दो दिवसीय 19वे मुस्लिम महिलाओं के सम्मेलन का समापन

Cultural Press Release
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भोपाल के शाहजहानाबाद के इस्लामी गेट मैदान में आयोजित दो दिवसीय 19वे सालाना इज्तमा ए ख़वातीन में दूसरे और अंतिम दिन ‘पर्दा तरक़्क़ी की राह में रुकावट नहीं’, ‘मां-बाप के साथ नेक बर्ताव क्यों जरूरी है, ‘बच्चों का व्यक्तिव निर्माण’ जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई।

दूसरे दिन इस सम्मेलन में शामिल होने वाली औरतों की संख्या 12 हज़ार तक पहुंच गई।

जमाअत ए इस्लामी भोपाल द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में हरदा से पहुंची यास्मीन साहिबा ने कहा कि पर्दा किसी महिला/लड़की की तरक़्क़ी में रुकावट नहीं है बल्कि पर्दा करने से औरत को सम्मान मिलता है। उनका कहना था कि आज के दौर में जब औरतें दिखावे और नुमाइश पर ज़ोर दे रही हैं, वे दरअसल धोखे में है। यास्मीन साहिब का कहना था जब एक लड़की अपने जिस्म को ढंक कर निकलती है तो न सिर्फ लोगों की गंदी नज़रों से बच जाती है बल्कि सम्मान भी पाती है।

उनका कहना था कि बेहूदा कपड़े पहन कर औरत जिस्म की नुमाइश करती है और छेड़छाड़ और रेप जैसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। इस्लाम इस बात पर ज़ोर देता है कि महिलाएं पर्दा करें।

ज़ाकिरा साहिबा ने बताया कि आज के दौर में लोग अपने माता-पिता को बुजुर्ग हो जाने पर घर से निकाल रहे हैं, वृद्धाश्रमों में लगातार बुजर्गों की भीड़ बढ़ती जा रही है।

उन्होंने कहा कि हज़रत मुहम्मद सल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया की अगर मां- बाप बुज़ुर्ग हैं, बीमार हैं तो युद्ध में जाने से बेहतर है माता-पिता की सेवा करना।

सीहोर की बुशरा साहिबा ने कहा कि हर एक मां को चाहिए कि वो अपने बच्चों को तालीम दे कि वो अपने दादा-दादी, नाना-नानी और यहां तक कि पड़ोस में रहने वाले बुज़ुर्गों के साथ अच्छा बर्ताव करें। उनकर साथ ऊंची आवाज में भी बात न करें।

अस्मा फलाही साहिबा ने अपनी तक़रीर क़ुरआन का रास्ता में कहा कि – क़ुरआन कहता है कि मुझे पढ़ो और समझ कर उस पर अमल करो, इसी से मोक्ष पाओगे। उन्होंने बताया के क़ुरआन आदेश देता है कि मां बाप की सेवा करो उन्हे उफ तक न कहो। क़ुरआन में दुआ सिखाइ गई है- ए हमारे मालिक, मेरे माता पिता पर रहम फ़रमा जिस तरह से उन्होंने मुझे पाला पोसा, मेरी देखभाल की, मेरी मदद की।

छिंदवाड़ा से तशरीफ़ लाई तलत फलाही साहिबा ने तीन तलाक़ के विषय पर कहा कि क़ुरआन में तलाक़ सिर्फ दो बार बताया गया है। उन्होंने कहा कि इस्लामी शरीयत के अनुसार ईश्वर को हलाल तरीके में सर्वाधिक नापसंदीदा काम तलाक़ है। लेकिन अगर मियां-बीवी में नहीं बन पा रही है तो फिर मजबूरन तलाक़ दिया जाएगा वो भी क़ुरआन में बताए गए सही तरीके से।

उन्होंने कहा कि अशिक्षा की वजह से मुस्लिम समाज में यह ग़लतफ़हमी बन गयी है कि एक बार में ही तीन बार तलाक़ कह देना चाहिए जो कि ग़लत तरीका है।
तलत फलाही ने तलाक के सही तरीके से सम्मेलन में पहुंची महिलाओं को वाकिफ कराया। उन्होंने कहा कि क़ुरआन कहता है, एक महीने में एक बार तलाक़ कहना है, दूसरे में दूसरी बार। इस तरीके से मियां बीवी के बीच सुलह की गुंजाइश रहेगी। लेकिन अगर कोई एक बार में तीन तलाक़ दे देता है तो ज्यादती है जिसकी इस्लाम में कोई जगह नहीं है।

जमाअत ए इस्लामी मध्यप्रदेश की महिला विंग की अध्यक्ष माहनाज़ साहिबा ने बताया कि मुस्लिम बंदे को चाहिए कि वो ईश्वर से अपना ताल्लुक मज़बूत करे, क्योंकि अल्लाह की मदद के बगैर कोई भी शख्स कामयाब नहीं हो सकता।

इंदौर से सम्मेलन में पहुंची माहरुख साहिबा ने कहा कि ईश्वर इस बात को पसंद करता है कि उसके रास्ते में क़ुरबानी दी जाए। सम्मेलन में पहुंची औरतों से उन्होंने अपील की कि वो आपस में फ़िज़ूल बातों से बचें। पीठ पीछे किसी की बुराई न करें, क्योंकि ईश्वर सब देख सुन रहा है और यह उसकी नज़र में बड़ा गुनाह है।

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